अनुच्छेद -13 (मूल अधिकार)
मूल अधिकार से असंगत जो भी कानून है। उसके बारे में आपको बताता है आर्टिकल 13 इसमें बात किया जाए तो इसमें कानून का उल्लेख करता है। शासन प्रणाली के बारे में बताता है आर्टिकल 13 में दो तरह का शासन प्रणाली को बताता है मतलब कि यहां पर ही जुडिशल और नॉन ज्यूडिशियल दोनों का व्यवस्था के बारे में उल्लेख किया गया है बताया गया है आर्टिकल 13 को आप समझने का प्रयास करते हैं इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के राज्य क्षेत्र में प्रवेश सभी विधियां उस मात्र तक शुन्य होगी जिस तक वह इस भाग के बंधों से असंगत होगी यह बोलता है आर्टिकल 13(1) में जो हम बोले अभी पास तरह के कानून का उल्लेख करता है तो पांच तरह के कानून में पहले आपका कानून जो होता है प्रावित विधि प्री कांस्टीट्यूशनल लॉ मतलब की संविधान जब लागू हुआ था देश में 26 जनवरी 1950 उससे पहले के एक दिन पहले के कानून चाहे हजारों लाखों करोड़ों वर्ष पहले उसके बारे में उल्लेख करता है आपका प्रावित विधियां आर्टिकल 13 खंड 1 में स्पष्ट रूप से बोल क्या गया है वह यहां पर बोला गया है कि संविधान प्रारंभ होने से पहले मतलब की 26 जनवरी 1950 से पहले प्राइवेट सभी विद्या मतलब की पूर्व की सभी विधि चाहे कानून जुडिशल हो इस मंत्र तक सुनने मानी जाएगी जब तक वह मौलिक अधिकारों का हनन करेगी या शून्य करेगी ठीक है अगर पहले के कानून जो है वह मौलिक अधिकार को हनन नहीं करती है मौलिक अधिकार को सुनते नहीं करती है तो पहले के कानून जो है वह सुनने नहीं माने जाएंगे मतलब कि देश में चलन में रहेंगे ठीक है यह बोलता है आपका आर्टिकल 13 का खंड एक अच्छा मान लीजिए पहले के जो कानून है वह मौलिक अधिकार को कुछ परसेंटेज मतलब मान लीजिए 30% हनन कर रहा है ठीक है बाकी के 70% मौलिक अधिकार को कुछ वैसे क्षति पहुंच रहा है वह खत्म हो जाएगा उसको शून्य कर देगा नहीं ऐसा नहीं होगा जितना परसेंट आपका मौलिक अधिकार को हनन करेगा उतना ही परसेंट पहले के कानून सुनने माने जाएंगे अगर 30% मौलिक अधिकार को हनन कर रहा है तो 30 परसेंट कानून जो है वह सुनने माने जाएंगे बाकी के जो 70% है अगर चलने के लायक रहे तो वह कानून चलेंगे ऐसा आपका बोलता है आर्टिकल 13 खंड एक में तो यहां हम नॉन ज्यूडिशियल और जुडिशल दोनों का बात किया क्योंकि संविधान बनने से पहले या फिर संविधान लागू होने से पहले जुडिशल कानून व्यवस्था भी चलती थी और नॉन ज्यूडिशियल कानूनी व्यवस्था भी चलती थी आपका वह ब्रिटिश शासन के द्वारा बनाया गया जितना कानून था वह था और अलिखित व्यवस्था मतलब की जो हमारे पुरखों ने बनाया आदिवासियों ने जो भी कानून ने बनाई व्यवस्था बनाई जो व्यवस्था है ग्राम सभा का व्यवस्था अब ग्राम सभा नहीं स्वशासन व्यवस्था जो भी बनाई थी उसके बारे में उल्लेख करता है कि संविधान जब भी लागू हुआ उससे पहले के जितने भी कानून हुआ करते थे ज्यूडिशल सिस्टम बोलता है कि संविधान प्रारंभ होने से पहले मतलब की 26 जनवरी 1950 से पहले सभी विधियां मतलब पूर्व की सभी विधियां चाहे जुडिशल हो चाहे नॉन ज्यूडिशियल हो इस मात्रा तक शून्य होगी या शून्य मानी जाएगी जब तक हुए मौलिक अधिकारों को हनन करेगी आपका दूसरा तरह का कानून का स्रोत के दूसरा तरह का कानून है या फिर बोल दीजिए जो अस्थाई विधायक स्रोत है इसका उल्लेख किया गया आप लोग का आर्टिकल 13 खंड 2 में और इसमें बोलना है कि राज्य राज्य का मतलब वह राज्य क्षेत्र वाला नहीं एरिया वाला नहीं राज्य का मतलब होता है केंद्र सरकार राज्य सरकार संसद विधानमंडल जिसका की उल्लेख आप लोग का आर्टिकल 12 में है उसे राज्य का यहां पर बात किया गया है और यहां पर बोलता है कि राज्य ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाएगा जिससे इस भाग इस भाग का मतलब है यहां पर मौलिक अधिकार को छिनती है मौलिक अधिकार को हनन करता है या मौलिक अधिकार को शून्य करता है ठीक है और मान लीजिए अगर राज्य ऐसी कोई कानून बना भी लेता है जिससे की मौलिक अधिकार को हनन करता है या फिर मौलिक अधिकार को शून्य होता है तो ऐसे कानून भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर नहीं माने जाएंगे या फिर उसको लागू नहीं करेगा यह जो है वह अस्थाई विधायी स्रोत का कारण है अस्थाई विधायक स्रोत को इंग्लिश में बोलते हैं पोस्ट कांस्टीट्यूशनल लॉ मतलब की संविधान बनने के बाद की जितनी भी विधियां है उसके बारे में बताता है यहां तो अस्थाई विधायी स्रोत को हम लोग समझते हैं तो विधायिका द्वारा विधायिका द्वारा जितने भी कानून बनाए जाते हैं मतलब की लोकसभा और विधानसभा के द्वारा यह कानों ने बनाई जाती है और लोकसभा के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाए जाते हैं और विधानसभा के द्वारा राज्य स्तर पर कानून बनाए जाते हैं ठीक है तो आर्टिकल 13 का खंड 2 में आपका पोस्ट कांस्टीट्यूशनल लॉ या बोल दीजिए परमानेंट लॉ या अस्थाई विधायक स्त्रोत का उल्लेख करता है। राज्य मतलब होता है जो भी करता आर्टिकल 12 में राज्य का मतलब है केंद्र सरकार राज्य सरकार संसद विधान मंडल यह सब ठीक है तो यहां पर बोलता है कि राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा मतलब कि राज्य ऐसा कोई का कोई भी कानून नहीं बनाएगा जिससे इस भाग द्वारा प्रदत अधिकारों को छिनती है मतलब की प्रदत अधिकारों को भाग द्वारा प्रतीत अधिकारों को तो भाग द्वारा प्रतीत अधिकारी क्या है आपका मौलिक अधिकार है वह ठीक है नहीं बनाएगा जिससे मौलिक अधिकार को चिंता है कि इस खंड के उल्लंघन में प्रत्यय बनाई गई प्रत्येक विधियां उल्लंघन की मात्रा तक शून्य होगी मतलब कि इस खंड खंड मतलब क्या मौलिक अधिकार का उल्लंघन में जितना भी कानून बनाया जाएगा वह सारे कानून आपके सुनने माने जाएंगे इस मंत्र तक जैसे हम बोले थे ना खंड एक में आप लोग को 30% अगर कानून हनन करेगा तो 30% ही सुनने माना जाएगा पहले की विधि इस तरह अगर मौलिक अधिकार को मान लीजिए राज्य ऐसा कोई कानून बनता है ठीक है जिससे की मौलिक अधिकार का 30% हनन हो रहा है तो वह 30% कानून ही नहीं लागू होगा जो 70%कानून रहेगा तो यहां पर यही बोलता है कि राज्य से कोई भी कोई भी विधि नहीं बनाएगा जिससे की मौलिक अधिकार को हनन करेगा या फिर मौलिक अधिकार को छीनेगा अगर मान लीजिए राज्य ऐसा कोई भी कानून बना भी देता है जिससे की मौलिक अधिकार का हनन होता है या फिर मौलिक अधिकार को शून्य करता है तो वह कानून भारत के अंदर लागू नहीं होगा ऐसा आपका बोलता है आर्टिकल 13 का खंड 2 आर्टिकल स्रोत के बारे में बताया गया है जो इस बात के मतलब के जितने भी वह है उनको शून्य नहीं करेगी नेचर लोक सभा विधान सभा के लोकसभा जो होता है वह राष्ट्रीय स्तर का कानून बनता है और विधानसभा जो है वह राज्य स्तर का कानून बनता है। आपका है नॉन लेजिसलेटिव सोर्स ऑफ़ लो या फिर उसको आप बोलिए की गैर विधायी स्रोत तो अस्थाई विधायी इसको इंग्लिश में बोलते हैं टेंपरेरी लो मतलब की कुछ समय के लिए लाया जाता है कुछ दिन के लिए लाया जाता है जब देश में इमरजेंसी होता है तब यह देखिए यह जो होता है ना इसको अध्यादेश जो की लाया जाता है 6 सप्ताह से लेकर के 6 महीने तक के लिए जब देश में किसी टाइप का इमरजेंसी हो इमरजेंसी बोले तो आपातकालीन की स्थिति बनी हुई हो जैसे देश में कोई महामारी आ जाए आ जाता है तब या फिर देश में किसी टाइप का जंग छिड़ हुआ होता इस समय आपका स्थाई भाव काकानून बैठे हुए रहते हैं ऑफिसर्स जैसे आईएएस ऑफिसर हो गए आईएएस ऑफिसर होगा आईपीएस ऑफिसर होगा आईआरएस ऑफीसर हो गया और भी बहुत सारे ऑफिसर्स होते हैं जो ऊंचे पद पर बैठे हुए रहते हैं अपर लेवल के प्राधिकरण कहलाते हैं और यही लोग अध्यादेश लाते हैं अब आपको नाम से पता चलता है इसमें की जो परमानेंट लॉ नहीं है यानी कि जो परमानेंटली लागू नहीं होता है जैसे यहां पर स्रोत बोले तो यहां से जो राजस्थान विधायक के स्रोत के थ्रू जो कानों ने बनता है वह सभी को क्या बोलेंगे उनको अध्यादेश बोलेंगे अध्यादेश यानी कि कुछ टाइम के लिए जैसे यहां पर हमारे देश में कोरोना के चलते लॉकडाउन लगा हुआ था तो लॉकडाउन लगा हुआ था तो वह अभी भी लगा है क्या परमानेंट नहीं लगा हुआ है ना वह जब कोरोना था तब के लिए लगा हुआ था तो यह एक तरह से क्या हुआ यह भी एक तरह से अध्यादेश बना हुआ था लॉकडाउन का जारी किया गया था तो यह इसका अध्यादेश का पावर कब से कब तक रहता है बोलने से चाहे सप्ताह से लेकर 6 महीना तक आना तो यह पूरे नेशनल लेवल पर बोले तो राष्ट्रपति तैयार करता है यह अनुच्छेद 123 के तहत और स्टेट लेवल पर राज्यपाल बना सकता है यह अनुच्छेद 213 के तहत नाम से ही पता चलता है अगर स्थाई बोले तो परमानेंट हो जाता है वह चलते ही रहता है यानी कि कुछ कुछ समय के लिए और तो अस्थाई विधायक स्त्रोत का मतलब परमानेंट के लिए नई कानून रहता है वह 6 सप्ताह से 6 महीना के लिए अस्थाई विधायक स्रोत कानून बनता है उसके बाद खत्म हो जाता है आप कौन बनाते हैं मिठाई का थोड़ा समझ नहीं पा रहे हैं उसको यह कार्यपालिका क्योंकि राष्ट्रपति आपके कार्यपालिका राज्यपाल कार्यपालिका होते हैं ना ज्यादा कोई नहीं पूछेगा सीधा पूछेंगे ना कि यह कानून कौन लाता है एक बार बता दीजिए फिर से जब देश में आपातकाल की स्थिति पैदा होता है और दूसरा महामारी की स्थिति पैदा हो जाता है लोग बाग मारना शुरू हो जाते हैं ऑटोमेटेकली और तीसरा है युद्ध की स्थिति पैदा हो जाता है मैंने लड़ाई झगड़ा उत्पन्न हो जाता है यह देश भी देश या इस देश के अंदर में मार काट की स्थिति पैदा हो जाता है उसे सिचुएशन को रोकथाम के लिए राष्ट्रपति के द्वारा अपने देश को ऐसी सिचुएशन को शांत करने के लिए अनुच्छेद 123 के माध्यम से लाते हैं एक आध्या देश देश में लागू करता है या राज्य में लागू करता है ठीक है तीसरा होता है न्यायपालिका मतलब किसका काम होता है न्याय देने का और जो भी कानून बनाई गई है उसकी व्याख्या करने का ठीक है तो हम यहां पर तीनों को समझाएं उसमें से आपका एक है कार्यपालिका जो देश में कानून लागू करता है तो यह जो प्रातयोजित विधायी स्रोत है आपका वह आपका कार्यपालिका से रिलेटेड है कार्यपालिका से संबंध रखता है मतलब ऐसे कानून को कार्यपालिका द्वारा बनाया जाता है जिसमें आदेश अधिसूचना विधि नियम अप नियम यह सब सब आता है।
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